
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में जिस टेस्ट के डेढ़ सौ रुपये लिए जाते हैं, निजी लैब में वही टेस्ट पंद्रह सौ रुपये चुकाने के बाद होता है। सरकारी और निजी लैब के टेस्ट रेट में बड़ा अंतर है। इन्हें पूछने और रोकने वाला कोई नहीं। स्वास्थ्य महकमे के सरकारी रिकार्ड में शहर में 43 निजी लैब चल रही हैं। मरीजों से कितनी टेस्ट फीस ली जाए, इस बारे में स्वास्थ्य महकमे की ओर से कोई दिशा निर्देश जारी नहीं हैं। एक तरह से मरीज से टेस्ट फीस के नाम पर खुली लूट का लाइसेंस महकमे ने दे रखा है।
आईजीएमसी लैब में जो टेस्ट तीस रुपये का है, उसी टेस्ट के निजी लैब में दो सौ तक वसूल किए जाते हैं। आखिर सरकारी और निजी लैबों के टेस्ट रेटों में इतना अंतर कैसे हो सकता है। इतना ही नहीं, निजी लैब से जो टेस्ट रिपोर्ट जारी होती है, उसकी सत्यता को परखने की भी कोई सुविधा नहीं है। यह मरीजों की जान के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है। सरकारी अस्पतालों में जब टेस्ट लैब बंद हो तो मरीजों को मजबूरी में निजी लैब में टेस्ट करवाने जाना पड़ता है। अस्पतालों के इर्द गिर्द कुकरमुतों की तरह उगी इन लैबों पर नजर रखने वाला कोई नहीं।
सरकारी रेट प्राइवेट रेट
ईसीजी – 30 रुपये 100 रुपये
एंडोस्कोपी – 150 रुपये 1200 से 1500 रुपये
ईईजी – 100 रुपये 200 रुपये
ब्लड ग्रुपिंग – 10 रुपये 50 रुपये
यूरिन टेस्ट – 10 रुपये 50 रुपये
स्टूल टेस्ट – 10 रुपये 50 रुपये
प्रेगनेंसी टेस्ट – 30 रुपये 100 रुपये
हीमोग्लोबिन टेस्ट – 5 रुपये 50 रुपये
शुगर टेस्ट – 15 रुपये 50 रुपये
यूरिक ऐसिड- 25 रुपये 60 रुपये
केलेस्ट्रोल – 25 रुपये 100 रुपये
एक्सरे – 15 रुपये 100 से 150 रुपये
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जल्द फीस निर्धारित करेंगे
स्वास्थ्य निदेशक डा. कुलभूषण सूद ने कहा कि अब तक इन प्राइवेट लैब के रेट निर्धारित नहीं किए गए हैं। लेकिन लोगों की परेशानी देखते हुए और इनकी प्राइवेट क्लीनिक की फीस की मनमानी को देखते हुए जल्द ही फीस निर्धारित कर दी जाएगी।
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मालिक तय करते हैं रेट
निजी लैब एसोसिएशन के उपाध्यक्ष चंद्र ने कहा कि सभी निजी लैब के मालिक टेस्टों की फीस खुद ही निर्धारित करते हैं। किसी पर कोई रोकटोक नहीं है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन जल्द ही एक समान फीस निर्धारण के लिए कोई कदम उठाएगी।
